ब्रिटिश राजपरिवार के ये हैं बेहद कड़े नियम, जानकर उड़ जायेंगे आपके होश

ब्रिटिश राजपरिवार के ये हैं बेहद कड़े नियम, जानकर उड़ जायेंगे आपके होश

हर जगह अपने अलग कानून-कायदे बनाये गए है। जिनका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य होता है। लेकिन कुछ नियम ऐसे भी है जिनको सोचकर आप भी हैरान हो जायेंगे। आज हम आपको ब्रिटिश राजपरिवार के कुछ ऐसे नियम बताने जा रहे है। ब्रिटिश रॉयल परिवार का हिस्सा होना कोई आसान बात नहीं है। 

राजपरिवार के होते हैं ये कड़े नियम:

दुनियाभर के ऐशोआराम होने के बाद भी ब्रिटिश परिवार को अगर कोई तोहफा दिया जाता है तो उसे वे लेने से नकार नहीं सकते है। भले ही तोहफा कितना ही बचकाना क्यों न हो, उन्हें उसे लेना ही होता है।


सार्वजनिक मौकों पर कोई भी उनसे आगे नहीं चल सकता है। यहां तक कि उनके पति प्रिंस फिलिप भी उनसे चार कदम पीछे रहते हैं।

शाही लोगों और उत्तराधिकारियों को किसी रिश्ते में जाने से पहले बाकायदा क्वीन की इजाजत लेनी होती है। ऐसे में शाही खानदान कई बार एतराज भी लेता है।

सार्वजनिक समारोहों से लेकर पार्टीज में भी परिवार के हरेक सदस्य के लिए एक खास ड्रेस होती है। वो कैजुअल कपड़ों में नहीं आ सकते, जैसे कि जींस या हल्की सी कोई ड्रेस।


इसी को ध्यान में रखते हुए एक नियम ये भी है कि शाही परिवार के दो वारिस एक साथ ट्रैवल नहीं कर सकते है। कोई दुर्घटना हो जाए तो साथ ट्रैवल करने वालों के दुर्घटनाग्रस्त होने का बराबर डर रहता है।


यहां प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शुरू की जाएगी पालकी सेवा, वजह जानकर होंगे हैरान

यहां प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शुरू की जाएगी पालकी सेवा, वजह जानकर होंगे हैरान

आज भी विकास के इस युग में कई जगह ऐसी है जहां सड़क और वाहन की सुविधा नहीं है। गर्भावस्था के दौरान भी निकटतम अस्पताल तक पहुंचने के लिए महिलाओं को मीलों पैदल चलना पड़ता है। लेकिन अब महिलाओं की इस दुविधा को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने महिलाओं को अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए पालकी सेवा शुरू की है। 

शुरू की जाएगी पालकी सेवा

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए निकटतम रोड हेड या अस्पताल लाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 500 'डोलिस' या पालकी की व्यवस्था करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को हाल ही में दस लाख रुपये जारी किए।


यहां चलेगी पहली पालकी 

नैनीताल उत्तराखंड का पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा को दूर करने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है। कुछ पैसे हमेशा अस्पताल में रखे जाएंगे और 2,000 रुपये किसी भी व्यक्ति को दिए जाएंगे जो गर्भवती महिला को पालकी में रखकर अस्पताल लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।