दूल्हे को पास नहीं आने देती थी दुल्हन, फिर दुल्हन के मेडिकल टेस्ट में हुआ ये खुलासा

दूल्हे को पास नहीं आने देती थी दुल्हन, फिर दुल्हन के मेडिकल टेस्ट में हुआ ये खुलासा

शादी के बाद दूल्हे-दुल्हन का रोमांस चरम पर होता है लेकिन एक दूल्हे का रोमांस भरी जिंदगी बर्बाद हो गयी। ऐसी ही हम एक घटना आपको बताने जा रहे है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 28 अक्टूबर को एक युवक की बड़ी धूमधाम से शादी हुई थी और सहारनपुर निवासी युवती को वह जीवनसाथी बनाकर घर लाया था। शादी के पांच महीने बीत जाने के बाद भी युवती दूल्हे को पास नहीं आने दिया करती थी तो उसे कुछ शक हुआ।

दुल्हन का हुआ मेडिकल

जब दुल्हन लगातार बहाना बनाकर युवक को अपने पास आने से रोकती रही तो परिवार वालों को शक हुआ। इसके बाद परिवार दुल्हन को लेकर डॉक्टर के पास गया और मेडिकल जांच कराई। मेडिकल जांच में पता चला कि दुल्हन किन्नर है और जैसे ही यह बात परिवार को पता चली तो उनके होश उड़ गए। 

पुलिस में पहुंचा ये मामला

दुल्हन ने पुलिस को फोन कर बताया कि उसे बंधक बनाया गया है जिसके बाद पुलिस दुल्हन और परिवार वालों को थाने ले आई जहां खूब हंगामा हुआ और मेडिकल जांच के दस्तावेज दिखाकर ससुराल वालों ने दुल्हन के मेडिकल दस्तावेज दिखाकर सुसराल में रखने से मना कर दिया। बाद में दुल्हन को उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया।


यहां प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शुरू की जाएगी पालकी सेवा, वजह जानकर होंगे हैरान

यहां प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए शुरू की जाएगी पालकी सेवा, वजह जानकर होंगे हैरान

आज भी विकास के इस युग में कई जगह ऐसी है जहां सड़क और वाहन की सुविधा नहीं है। गर्भावस्था के दौरान भी निकटतम अस्पताल तक पहुंचने के लिए महिलाओं को मीलों पैदल चलना पड़ता है। लेकिन अब महिलाओं की इस दुविधा को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने महिलाओं को अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए पालकी सेवा शुरू की है। 

शुरू की जाएगी पालकी सेवा

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए निकटतम रोड हेड या अस्पताल लाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 500 'डोलिस' या पालकी की व्यवस्था करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को हाल ही में दस लाख रुपये जारी किए।


यहां चलेगी पहली पालकी 

नैनीताल उत्तराखंड का पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा को दूर करने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है। कुछ पैसे हमेशा अस्पताल में रखे जाएंगे और 2,000 रुपये किसी भी व्यक्ति को दिए जाएंगे जो गर्भवती महिला को पालकी में रखकर अस्पताल लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।