मुलायम और अखिलेश यादव से नजदीकी के लिए चर्चा में रहे नरेंद्र गिरि

मुलायम और अखिलेश यादव से नजदीकी के लिए चर्चा में रहे नरेंद्र गिरि

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव तथा उनके पुत्र अखिलेश यादव से नजदीकियों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। 2012 से लेकर 2017 तक अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री रहे, तब अक्सर महंत की उनसे मुलाकात होती थी। अखिलेश हमेशा उनके द्वारा रखी गई बातों को गंभीरता से लेते थे। उस पर अमल होता था। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से उनकी जितनी नजदीकियां थीं, उतने ही वह शिवपाल सिंह यादव के भी करीबी रहे। नई पार्टी बनाने के बाद भी शिवपाल जितनी बार प्रयागराज आए, अधिकतर बार नरेंद्र गिरि से मिले। महंत की मौत के बाद अखिलेश यादव ने कल ही दुख जताया था और आज मंगलवार को प्रयागराज आकर मठ में उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

अन्य दलों के नेता भी रहे उनके करीबियों में

2019 कुंभ मेले में स्नान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब फरवरी माह में संगम नगरी आए थे तो पहले वह महंत नरेंद्र गिरि से मिलने पहुंचे थे। अखिलेश ने जब संगम में स्नान किया तो स्वामी नरेंद्र गिरि ने उन्हें पूजा अर्चना कराई थी। स्नान के दौरान भी वह उनके साथ थे। यह मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं को पसंद नहीं आई थी। इसको लेकर तंज भी कसा गया था लेकिन, महंत ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी। शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से जब नाता तोड़कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाई तो उसके बाद भी वह प्रयागराज आने पर महंत से जरूर मिलते थे। कुंभ मेले के दौरान शिवपाल सिंह 31 जनवरी को प्रयागराज आए थे। शिवपाल पहले बाघम्बरी गद्दी गए थे। वहां पर उन्होंने नरेंद्र गिरि से करीब आधे घंटे बंद कमरे में बातचीत की थी। उसके बाद वह स्नान करने के लिए संगम गए थे। बाघम्बरी गद्दी की जमीन को लेकर जो विवाद चल रहा था, उसको सुलझाने में शिवपाल सिंह यादव ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय सपा की सरकार थी।


चाचा-भतीजा विवाद को सुलझाने में माना जा रहा था अहम

अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव में जब दूरियां ज्यादा बढ़ गई थीं तो उसे सुलझाने के लिए महंत नरेंद्र गिरि को भी अहम माना जा रहा था क्योंकि कुंभ मेले के दौरान अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव उनसे मिले तो यह अटकलें लगाई जा रही थी कि शायद वह दोनों के विवाद को सुझलाने में सहयोग करेंगे। मगर ऐसा हो नहीं सका था। क्योंकि शिवपाल अखिलेश से बहुत नाराज थे। शिवपाल ने तब कहा था कि अगर अब नेता जी भी उन्हें बुलाएंगे तो वह वापस सपा में नहीं जाएंगे।


4.5 वर्ष का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे CM योगी

4.5 वर्ष का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे CM योगी

लखनऊ: बीते कुछ समय से देश के कई राज्यों में सियासी हलचल बहुत ज्यादा बढ़ गई इस बीच 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत के लिए बीजेपी लगातार लोगों के बीच जा रही है तथा इसी क्रम में यूपी की योगी सरकार ने अपने साढ़े 4 साल की कामयाबियों का रिपोर्ट कार्ड आज लोगों के सामने पेश करने का फैसला लिया है. आज सीएम योगी लखनऊ में सरकार की उपलब्धियां गिनवाएँगे.

वही दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 तथा अन्य रोगों को देखते हुए डॉक्टरों की सेवानिवृत आयु 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की तैयारी की है. खबरों के मुताबिक, इस निर्णय से संबंधित प्रस्ताव पर शीघ्र ही मंत्रीमंडल की बैठक में मुहर लगाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर अपनी स्वीकृति भी दे दी है.

यूपी के चिकित्सा शिक्षामंत्री सुरेश खन्ना ने एक बयान में बताया कि हमें अधिक अनुभव वाले डॉक्टरों की विशेष रूप से जरुरत है. यूपी में कोविड-19 संक्रमण के बिगड़ते हालातों के दौरान डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ की तरफ से बहुत संवेदनशीलता तथा मजबूती के साथ कार्य किया गया. जिसे देखते हुए योगी सरकार ने डॉक्टरों के सेवानिवृत की आयु 5 साल और बढ़ाने का फैसला लिया है. इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के डॉक्टर्स को बड़ी राहत मिली है तथा योगी सरकार द्वारा लिया गया ये निर्णय डॉक्टर्स के लिए बहुत ज्यादा ठीक है.