आजमगढ़ का चुनाव अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का सवाल

आजमगढ़ का चुनाव अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का सवाल

लखनऊ उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर हो रहा उपचुनाव धीरे-धीरे दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है आजमगढ़ का चुनाव अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव और वो स्वयं इस सीट से सांसद रहे हैं तो क्या सैफई घराने के तीसरे सदस्य को आजमगढ़ की जनता जिताकर लोकसभा भेजेगी? माना जाता है कि उपचुनाव में ज्यादातर जीत सत्तापक्ष के प्रत्याशी को ही मिलती है, मगर गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में सूबे में बीजेपी के सत्ता में होते हुए भी सपा ने इन दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी

समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस चुनाव में नुपूर शर्मा के मामले को उठाकर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिशें प्रारम्भ कर दी हैं माहौल गरमाने के लिए समाजवादी पार्टी नेता क्षेत्र में नुपूर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं और आजमगढ़ में स्थान जगह उसके पोस्टर भी लगे हैं हालांकि आजम खान ने रामपुर में चुनाव प्रचार के दौरान अपने खास अंदाज में नुपूर का नाम तो लिया मगर किसी तरह का नया टकराव नहीं खड़ा किया

2014 में शिवपाल ने किया था आजमगढ़ में कैंप

आजमगढ़ के चुनावों में शिवपाल यादव एक बड़ा फैक्टर हैं 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान जब मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे थे तब बीजेपी से रमाकांत यादव और बीएसपी से शाह गुडडू जमाली ही मैदान में थे सूबे में समाजवादी पार्टी की गवर्नमेंट थी उसके बाद भी मुलायम सिंह यादव को चुनाव प्रचार के दौरान अपनी जीत को लेकर थोड़ा संशय हुआ तो उन्होंने शिवपाल को आजमगढ़ में कैंप करने को बोला शिवपाल यादव की संगठनात्मक क्षमता से हर कोई वाकिफ है स्थिति बिगड़ने से पहले संभल गई इसके बाद भी मुलायम सिंह लगभग 63 हजार वोटों से ही चुनाव जीत पाए थे सपा का फोकस हमेशा से ही एम-वाई समीकरण पर रहा है और शिवपाल यादव ने इसको संभाल कर रखा था मगर इस बार शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी से दूरी बना चुके हैं और उन्होंने निकाय चुनाव अकेले लड़ने की बात भी कह दी है ऐसे में उनके लोग किसके साथ जाएंगे किसको वोट करेंगे, पर एक बात तो तय है कि इससे समाजवादी पार्टी को ही हानि होना है

आसिम राजा हैं आजम खान के चहेते

अब बात करें रामपुर के चुनाव की तो आजम खान जो चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी नेतृत्व से नाराज दिख रहे थे और काफी तल्ख तेवर दिखा रहे थे उनके सुर भी काफी बदल गए हैं अखिलेश यादव ने आजम खान की नाराजगी दूर करने के लिए अपने गठबंधन के साथियों को नाराज कर दिया और आजम खान के कहने पर राज्यसभा और विधान परिषद में उनके चहेते प्रत्याशी उतारे इतना ही नहीं रामपुर उपचुनाव में भी आजम खान के चहेते आसिम राजा को पार्टी ने टिकट दिया है खास बात ये रही कि समाजवादी पार्टी के हेड आफिस लखनऊ से इसकी घोषणा ना होकर रामपुर के जिला कार्यालय से आजम खान ने आसिम राजा की उम्मीदवारी की घोषणा की

‘टीपू को ‘सुल्तान’ बनाया आसिम को भी ‘राजा’ बनाइए’

आजम खान के लिए रामपुर का उपचुनाव एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बनता जा रहा है पार्टी ने आजम की सारी मांगों को पूरा कर दिया है, ऐसे में आजम खान पर दबाव बढ़ता जा रहा है लंबे समय बाद रामपुर की चुनावी जंग में आजम परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है आजम खान को अपने इस निर्णय को ठीक साबित करने के लिए आसिम राजा की जीत सुनिश्चित करवानी होगी, इसलिए वो जनसभाओं में ये अपील कर रहे हैं कि कन्नौज के चुनाव में जिस तरह टीपू को ‘सुल्तान’ बनाया आसिम को भी ‘राजा’ बनाइए रामपुर में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधे लड़ाई है क्योंकि बीएसपी और कांग्रेस पार्टी चुनाव मैदान में नहीं हैं बीजेपी के प्रत्याशी घनश्याम लोधी किसी जमाने में आजम खान के करीबी लोगों में शुमार रहे हैं नवाब खानदान से भी चुनाव मैदान में कोई नहीं है और आजम खान से इनकी अदावत जग जाहिर है ऐसे में नवाब खानदान के असर वाले मुसलमान वोटर किस तरफ जाएंगे ये भी एक बड़ा प्रश्न है

बसपा और कांग्रेस पार्टी के मैदान में ना होने का किसे मिलेगा लाभ!

वरिष्ठ पत्रकार रंजीव कुमार का मानना है कि वैसे बीएसपी और कांग्रेस पार्टी दोनों ही मैदान में नहीं है तो उनके समर्थकों का रुख काफी हद तक इस उपचुनाव में निर्णायक किरदार निभा सकता है यदि ये वोटर बीजेपी की तरफ जाते हैं तो समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के लिए लड़ाई कठिनाई हो जाएगी आजम खान मंझे हुए राजनेता हैं और वो भी इस बात से भलीभांति वाकिफ हैं इसलिए वो बार बार चार दशकों की वफादारी जैसी बातों का जिक्र कर रहे हैं और पूरे चुनाव प्रचार में भावुक भाषण दे रहे हैं ताकि जनता की सहानुभूति उनको मिले सके बीच बीच में वो नुपूर शर्मा का भी जिक्र कर रहे हैं जिससे साफ जाहिर है कि समाजवादी पार्टी हर तरह से चुनाव को अपने पक्ष में करना चाह रही है