US-Iran dispute: टेंशन में क्यों है भारत, जानिए कितना होगा नुकसान?

US-Iran dispute: टेंशन में क्यों है भारत, जानिए कितना होगा नुकसान?

नई दिल्ली: अमरीका व ईरान टकराव ( US-Iran dispute ) अपने चरम पर है. भले ही अमरीका ( America ) ने आदेश के बाद कोई हमला ना किया हो, लेकिन स्थिति बहुत ज्यादा गम्भीर बनी हुई है. ऐसे में हिंदुस्तान के लिए बहुत ज्यादा परेशानियां खड़ी हो सकती है. अमरीका व ईरान के बीच युद्घ हिंदुस्तान की योजनाओं व विकास में बाधा पहुंचा सकता है. युद्घ की स्थिति बनती है तो ( crude oil Price ) में तेजी आएगी. जिससे हिंदुस्तान के कच्चे ऑयल का आयात बिल ( ) बढ़ जाएगा. विदेशी खजाने में कमी आएगी व रुपए की स्थिति कमजोरी होगी. जिसका प्रभाव हिंदुस्तान की कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा. हाल ही में में 5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी. जिसके बाद हिंदुस्तान ने सऊदी अरब ( Saudi Arabia ) से बात कर ों स्थिर रखने को बोला था.

बढ़ जाएगा आयात बिल
जब भी इंटरनेशनल बाजार में ों में इजाफा होता है, तब-तब हिंदुस्तान के आयात बिल में इजाफा देखने को मिलता है. इसका कारण है कि हिंदुस्तान कच्चे ऑयल का आयात बहुत ज्यादा मात्रा में करता है. अगर आंकड़ों की बात करें तो फरवरी 2019 में हिंदुस्तान का कुल आयात बिल 507 अरब डॉलर था, जिसमें 114 अरब डॉलर सिर्फ कच्चे ऑयल का आयात बिल था. अनुमान के अनुसार वित्त साल 2019 में यह बढ़कर 115 अरब डॉलर के पार जा सकता है.

विदेशी पूंजी भंडार होगा खाली
जैसा कि हमने आपको बताया कि ों में इजाफा होने से हिंदुस्तान का आयात बिल बढ़ जाएगा. अगर आयात बिल में इजाफा होता है तो हिंदुस्तान जैसे देश का विदेशी पूंजी भंडार बहुत ज्यादा प्रभावित होता है. क्योंकि जब आप कच्चा ऑयल खरीदते हैं तो उसका भुगतान डॉलर में करते हैं. जितना महंगा ऑयल होगा, आपको उतना ज्यादा डॉलर देना होगा. आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में हिंदुस्तान का विदेशी पूंजी भंडार करीब 425 अरब डॉलर है. इसका आंकड़ा हर हफ्ते बदलता रहता है.

रुपए में आएगी कमजोरी
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आती है तो किसी देश की मुद्रा अमरीकी मुद्रा के हिसाब से निर्बल होती है. कुछ ऐसे ही दशा हिंदुस्तान में भी देखने को मिलते हैं. जिस तरह के दशा पैदा हो रहे हैं आने वाले समय में भारतीय रुपए के निर्बल होने के इशारा मिल रहे हैं. क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का प्रभाव का मुद्रा पर पड़ेगा. देश के पास जितनी विदेशी मुद्रा कम होगी, रुपए की वैल्यू उतनी ही कम हो जाएगी. मौजूदा समय की बात करें तो अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 70 रुपए के आसपास पहुंच गई है. जिसके आने वाले दिनों में 72 व 73 रुपए तक पहुंचने के संभावना दिख रहे हैं.

देश की जीडीपी पर पड़ेगा प्रभाव
ों के बढऩे का प्रभाव देश की जीडीपी पर भी पड़ता हैं. हाल ही में क्रिकेट एजेंसियों ने बोला है कि ें अगर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती हैं तो जीडीपी पर इसका 0.4 प्रतिशत प्रभाव होता है व इससे चालू खाता घाटा 12 अरब डॉलर या इससे भी ज्यादा बढ़ सकता है. हिंदुस्तान की जीडीपी की बात करें तो 6 प्रतिशत से नीचे चली गई थी. जिसे हिंदुस्तान की ओर से एक बार फिर से बढ़ाने का प्रयाय किया जा रहा है. यह तभी संभव है जब ें स्थिर रहें.

कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा असर
वहीं ों में इजाफा होने से हिंदुस्तान की कल्याणकारी योजनाओं पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है. अगर अमरीका व ईरान में जंग के दशा बनते हैं व ों में इजाफा होता है तो सरकार के लिए स्वच्छता, सबको घर, स्वास्थ्य, बिजली, गरीबों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर भारी-भरकम खर्चा करने में बहुत ज्यादा कठिन आएगी.