इस खिलाड़ी ने रचा इतिहास अब बदलेगी भारतीय पुरुष मुक्केबाजी की तस्वीर

इस खिलाड़ी ने रचा इतिहास अब बदलेगी भारतीय पुरुष मुक्केबाजी की तस्वीर

विश्व चैंपियनशिप 1974 में प्रारम्भ हुई व हिंदुस्तान को अपना पहला पदक जीतने में 35 वर्ष लगे तो फाइनल में पहुंचने को 45 साल. हरियाणा के विजेंदर ने 2009 में कांसा जीतकर यह इंतजार समाप्त किया, तो अब उन्हीं के प्रदेश के पंघाल ने उनसे एक कदम आगे जाकर नया इतिहास रच दिया. अमित के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अब एक बार फिर भारतीय पुरुष मुक्केबाजी की भी तस्वीर बदलेगी.

अगले वर्ष होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों में अमित भारतीय पदक की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे. विजेंदर ने दस वर्ष पहले 2009 में दुनिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर जो आरंभ की थी अब पंघाल ने फाइनल में पहुंच उसे नयी उड़ान दी है. पंघाल अगर शनिवार को दुनिया चैंपियन बन जाते हैं तो यह भारतीय पुरुष मुक्केबाजी में मील का पत्थर साबित होगा.

18 वर्ष में स्त्रियों ने जीते 32 पदक

भारतीय स्त्रियों ने 18 वर्ष में नौ स्वर्ण, सात रजत व 16 सहित 32 पदक जीत लिए तो पुरुषों के खाते में सिर्फ छह ही आ पाए. इनमें से छह पीले तमगे अकेले रिंग की क्वीन एमसी मैरीकॉम ने जीते. उन्होंने छह बार दुनिया चैंपियन बनकर नया कीर्तिमान ही बना डाला. वह दुनिया चैंपियनशिप में सात पदक जीतने वाली संसार की एकमात्र महिला मुक्केबाज हैं. उनके बाद आयरलैंड की कैटी टेलर (5 स्वर्ण, 1 कांस्य) हैं. पुरुषों में क्यूबा के फेलिस सवोन के भी (6 स्वर्ण, 1 रजत) सात पदक हैं. मैरीकॉम के अतिरिक्त एल सरित देवी भी दुनिया चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते हैं. अगर ओवर आल की बात की जाए तो हिंदुस्तान महिलाएं रूस (54) व चाइना (46) के बाद तालिका में तीसरे नंबर पर हैं.