उद्योग जगत को मिली दीपावली से पहले दीपावली की सौगात सरकार ने किए यह बड़े एलान

उद्योग जगत को मिली दीपावली से पहले दीपावली की सौगात सरकार ने किए यह बड़े एलान

उद्योग जगत को मिली दीपावली से पहले दीपावली की सौगात

नई घरेलू कंपनियों के लिए कारपोरेट कर की दर अब 15 फीसदी

नये निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन, बढेंगे रोजगार के अवसर

अर्थव्यवस्था में मिलेगी नयी जान

उद्योग जगत को शुक्रवार को दीपावली से पहले ही दीपावली की सौगात मिल गई. सुस्त पड़ी अर्थव्यस्था में नयी जान फूंकने के लिए शुक्रवार को सरकार ने फिर कई बड़ी घोषणाएं कीं. एक ओर जहां पुरानी कंपनियों के लिये कारपोरेट कर की दर में करीब 10 प्रतिशत की कटौती कर उसे 25.17 प्रतिशत पर ला दिया तो दूसरी तरफ नया निवेश आकर्षित करने के लिए इनके ऊपर कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत करने की घोषणा की. सरकार ने कंपनियों के लिए निगम सामाजिक दायित्व -सीएसआर- कोष के तहत खर्च होने वाली दो प्रतिशत राशि के लिए कुछ नए क्षेत्र भी खोले.

छह बडे़ एलान

1. कॉरपोरेट कर: शिक्षा-स्वच्छ हिंदुस्तान सेस के साथ 25.17 प्रतिशत टैक्स

अब घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के कर की दर 22 प्रतिशत होगी. इसमें स्वच्छ हिंदुस्तान व एजुकेशन सेस व सरचार्ज जोड़ने के बाद कंपनी को 25.17 प्रतिशत कर देना होगा.

फायदा: बड़ी कंपनियों को

30 प्रतिशत के कारपोरेट कर के दायरे में आने वाली बड़ी कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा. इसके दायरे में प्राइवेट, लिमिटेड या सूचीबद्ध व बिना सूचीबद्ध वाली सभी तरह की कंपनियां आती हैं.

2. नयी कंपनियों को राहत: सेस-सरचार्ज के साथ 17.01 प्रतिशत कर

अब 1 अक्तूबर, 2019 के बाद बनने वाली विनिर्माण कंपनियों को 15 प्रतिशत की दर से कारपोरेट कर देना होगा. इसमें सभी तरह के सरचार्ज व सेस जुड़ने के बाद कर की दर 17.01 फीसदी होगी. अभी नए निवेशकों को 25 प्रतिशत की दर से कर चुकाना होता है. हालांकि, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के दायरे में आने वाली नयी कंपनियों को कर हॉलीडे जैसी किसी तरह की छूट या प्रोत्साहन नहीं मिलेगा.

फायदा: मेक इन इंडिया को बढ़ावा

मोदी सरकार के मेक इन इंडिया परियोजना को बूस्ट मिलने की उम्मीद है. अब कारोबारी नयी कंपनियों पर जोर देंगे. सुस्त पड़ चुकी स्टार्टअप योजना को भी बढ़ावा मिल सकता है. रोजगार के मौके पैदा होंगे. हालांकि, जो घरेलू कंपनी उत्पादन 31 मार्च 2023 के बाद करेगी, उसे इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा.

3. मैट की दरों में कमी: अब 15 फीसदी

कंपनियों को मौजूदा 18.5 प्रतिशत की बजाय 15 प्रतिशत की दर से न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) देना होगा. दरअसल, मैट उन कंपनियों पर लगाया जाता है जो मुनाफा तो कमाती हैं लेकिन रियायतों की वजह से इन पर कर की देनदारी कम होती है.

फायदा: विदेशी कंपनियां होंगी प्रोत्साहित

विदेशी कंपनियों में ज्यादा उत्साह देखने को मिल सकता है. मैट के चलते विदेशी कंपनियां इस कर की वजह से हिंदुस्तान में ज्यादा निवेश करने से कतराती हैं. अगर विदेशी निवेशकों का भारतीय मार्केट की ओर रुझान बढ़ता है तो 2025 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य सरलता से हासिल होने कि सम्भावना है.

4. कैपिटल गेंस: सरचार्ज हटा

शेयर मार्केट में निवेश करने वाले निवेशकों को राहत देते हुए कैपिटल गेंस पर से सरचार्ज हटा दिया गया है. 5 जुलाई को आम बजट में विदेशी व घरेलू निवेशकों को झटका दिया गया था. इनके शेयर मार्केट में निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस सरचार्ज बढ़ा दिया गया था.

फायदा: निवेशकों को राहत

सरकार के इस निर्णय का मतलब है कि जो लोग शेयर बेचने या इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं उन्हें राहत मिलेगी. दरअसल, कोई निवेशक जब शेयर या म्यूचुअल फंड बेचता है तो उसे यूनिट में मुनाफा होता है. इस मुनाफे को कैपिटल गेंस कहते हैं व इसी पर सरकार सरचार्ज वसूलती है.

5. बायबैक: मिली छूट

सरकार ने 5 जुलाई 2019 से पहले जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने शेयरों की पुनर्खरीद (बायबैक) की घोषणा की है, उन्हें भी किसी प्रकार का कर नहीं देना होगा.

फायदा: पुनर्खरीद करने वाली कंपनियां अपनी नकदी का ज्यादा प्रयोग कर पाएंगी.

6. सीएसआर: 2 प्रतिशत खर्च में छूट

कंपनियों के 2 प्रतिशत सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) खर्च में अब सरकार, पीएसयू इन्क्यूबेटर्स व सरकारी खर्च से चलने वाले संस्थान, आईआईटी भी शामिल होंगे.

फायदा: अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

कंपनियां सीएसआर कोष की राशि सार्वजनिक पैसे से चलने वाले विश्वविद्यालयों, आईआईटी, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं व आईसीएआर, आईसीएमआर, सीएसआईआर, डीआरडीओ जैसी स्वायत्त इकाइयों को भी दे सकती हैं जो विज्ञान, तकनीक, अभियंत्रण, चिकित्सा आदि क्षेत्र में अनुसंधान करते हैं.