जानें गुप्ता बंधुओं की कहानी, जो द0अफ्रीका का काला अध्याय है

जानें गुप्ता बंधुओं की कहानी, जो द0अफ्रीका का काला अध्याय है

पिछले वर्ष सुर्खियों में रहे गुप्ता बंधुओं के बेटों की उत्तराखंड के के बाद यह परिवार फिर सुर्खियों में है। तकरीबन एक वर्ष पहले गुप्ता बंधु क्यों सुर्खियों में थे? आइए, याद दिलाते हैं। वर्ष 2013 में दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने एक प्रोजेक्ट का ऐलान किया जिसका मकसद था - रंगभेद की वजह से पहले दरकिनार कर दिए गए छोटे पंजीकृत े के 'काले' किसानों व पशुपालकों को एक सहकारी यानी को-ऑपरेटिव की मदद से तरक्की की राह में जोड़ना। प्रोजेक्ट काबिले-तारीफ था लेकिन अंजाम ये हुआ कि दक्षिण अफ्रीका के नागरिकों की दौलत एक परिवार ने हड़प ली व इस साज़िश में शामिल होने के आरोपों के चलते दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति को त्याग पत्र तक देना पड़ा।

मीडिया में रही खबरों के मुताबिक मूलत: हिंदुस्तान के एक परिवार ने उस देश को धोखा देकर अरबों की चपत लगाई, जिस देश ने इस परिवार के लिए बिज़नेस के दरवाज़े व मौके खोले थे। व क्या है ग़बन, करप्शन व महाघोटाले की कहानी?

मसालों से प्रारम्भ हुआ था कारोबार

यह कहानी है यूपी के सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता परिवार की। घोटाले की कहानी तो कुछ ही वर्ष पहले प्रारम्भ हुई थी लेकिन इसकी जड़ें बहुत पुरानी थीं। अस्ल में शिवकुमार गुप्ता सहारनपुर का एक व्यापारी था जो छोटी किराना सामान का व्यापार करता था। इस धंधे में गुप्ता कुछ खास मसाले दक्षिण अफ्रीका के मेडागास्कर व जांजीबार से मंगवाता था। साउथ अफ्रीका के साथ इस परिवार का पहला संबंध यहीं से बना।

गुप्ता के बेटे बड़े हुए तो उसने व्यापार बढ़ाने के लिए 90 के दशक में पहले अपने बड़े बेटे अजय को चाइना के बाज़ार में पैर जमाने के लिए भेजा लेकिन अजय नाकाम रहा। फिर किसी तरह दूसरे बेटे अतुल को 1993 में साउथ अफ्रीका भेजा गया ताकि वह वहां व्यापार में तरक्की कर सके। अतुल ने अपने दिमाग, मेहनत व प्रतिभा से कामयाबी हासिल की व 1994 में उसकी मार्केटिंग कंपनी ने 1 मिलियन रैंड का टर्नओवर हासिल किया।

ऐसे जमती गईं दक्षिण अफ्रीका में जड़ें
सिर्फ तीन वर्षों में अतुल की कंपनी बहुत बड़ी हो गई व 1997 में उसकी कंपनी ने 100 मिलियन रैंड का कारोबार किया। तब इस कंपनी का नाम सहारनपुर से जोड़ते हुए बदलकर सहारा कंप्यूटर कर दिया गया। अब अतुल के पांव साउथ अफ्रीका में जम चुके थे व पूरा परिवार उसके साथ जुड़ने के लिए साउथ अफ्रीका पहुंच गया व धीरे धीरे सब उसी देश के नागरिक हो गए।

कंपनी बड़ी होती चली गई व माइनिंग, सोना, कोयला, हीरा, स्टील, वाहन निर्माण जैसे कई तरह के कारोबारों में भिन्न भिन्न नामों से गुप्ता परिवार की कंपनियां खुलने लगीं व देखते ही देखते गुप्ता परिवार साउथ अफ्रीका के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल हो गया। इतनी बड़ी सोसायटी में शामिल होते हुए क्रिकेट, फिल्म व पॉलिटिक्स की तमाम बड़ी हस्तियों के साथ गुप्ता परिवार के संबंध गहरे होने लगे थे वगुप्ता परिवार ने कई मौकों पर इन हस्तियों के साथ अपने संबंधों की नुमाइश भी की।

जैकब ज़ूमा से थे ज़ाहिरी रिश्ते
साउथ अफ्रीका के हाई प्रोफाइल सर्कल में गुप्ता परिवार का नाम आ चुका था व खुले तौर पर यह परिवार दक्षिण अफ्रीकी राजनीतिज्ञ जैकब ज़ूमा का नज़दीकी बन चुका था। जैकब वर्ष 2003 के आसपास दक्षिण अफ्रीका के उप राष्ट्रपति थे। जैकब के राजनीतिक प्रचार व प्रसार में गुप्ता परिवार फंडिंग का खास स्रोत बन चुका था।