हिजबुल में एंट्री चाहिए तो सुरक्षाबलों पर हमलाकर दिखाना होगा

हिजबुल में एंट्री चाहिए तो सुरक्षाबलों पर हमलाकर दिखाना होगा

पुलावामा हमले के बाद से इंडियन आर्मी की ओर से लगातार की जा रही आतंकवादी कार्रवाई से परेशान आतंकवादी हिंदुस्तान में घुसपैठ की हौसला तक नहीं कर पा रहे हैं। भाने घाटी में आतंकवादियों की कमर तोड़ दी है। खुफिया जानकारी के मुताबिक हिजबुल ने युवाओं को अपने आतंकवादी संगठन में जोड़ने के लिए नयी शर्त रखी है।

इंटेलीजेंस रिपोर्ट में ये साफ हुआ है कि घाटी में हिज़बुल ने शर्त रखी है की जो कोई भी युवा हिज़बुल से जुड़ना चाहता है उसे सबसे पहले किसी आतंकवादी घटना को अंजाम देना होगा। बाकायदा पुलवामा में सुरक्षाबलों पर आतंकवादी हमला करने का फ़रमान जारी किया गया है। जानकारों की मानें तो इस फ़रमान के पीछे दो वजह देखी जा रही है। पहला की आतंकवादी ये तस्दीक कर लेना चाहते हैं की जो भी उनके संगठन में शामिल हो रहा है कहीं वो उनसे जुड़ी जानकारी सुरक्षाबलों से साझा तो नहीं कर रहा है। क्योंकि पिछले कुछ समय से ये देखा जा रहा है कि लोकल निवासीयों की सटीक जानकारी साझा करने के चलते सुरक्षाबल बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं व आतंकवादियों को मृत्यु के घाट उतारा जा रहा है।

दूसरी वजह ये है की संगठन में शामिल होने से पहले अगर कोई युवा आतंकवादी घटना को अंजाम दे रहा है तो पुलिस व सुरक्षाबलों के रडार पर आ जाएगा व फिर उसकी मुख्यधारा में लौटने की आसार कम हो जाएगी। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष अब तक कुल 50 कश्मीरी युवाओं ने आतंकवादी संगठनों को ज्वाइन किया है। इसमें हिज़बुल मुजाहिदीन में 30, लश्कर में 5, जैश में 14 व एक अन्य संगठन में आतंकवादी तंजीम में शामिल हुए। जो की पिछले वर्ष के मुक़ाबले बहुत ज्यादा कम है। अगर हम पिछले पांच वर्ष के आंकड़े पर नज़र डालें तो सबसे ज़्यादा 209 युवा 2018 में आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए तो 2017 में 128 , 2016 में 84, 2015 में 83 व 2014 में सिर्फ 63 लोगो ने आतंकवादी संगठन से जुड़े थे।