आजादी के अमृत महोत्सव में डासना जेल के बंदी लिख रहे इबारत

आजादी के अमृत महोत्सव में डासना जेल के बंदी लिख रहे इबारत

हर घर तिरंगा महोत्सव के चलते अचानक बढ़ी मांग, मेरठ की कंपनी ने दी ट्रेनिंग.

आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर तिरंगों की मांग बढ़ी है. जिले में 9 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज मौजूद कराने का लक्ष्य रखा गया हैं. इसी के बाद डासना कारागार के अधीक्षक आलोक सिंह को विचार आया कि कारागार में पहले से ही टेलरिंग यूनिट उपस्थित है. उसका उपयोग कर कारागार के आजादी के इस महोत्स में सहयोग दिया का सकता है. विचार को पंख देने के लिए मेरठ के कंपनी से संपर्क साधा गया. कारागार अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि कंपनी ने बंदियों को ध्वज सिलने और तैयार करने की बेसिक ट्रेनिंग भी दी. जिसके बाद तिरंगे की तैयारी जमीनी स्तर पर दिखने लगी. डासना कारागार में 20×30 इंच के झंडे तैयार किये जा रहे है. जो सबसे अधिक मांग में हैं. ये झंडे हापुड़ जिले को भी भेजे जाएंगे.

राष्ट्रीय ध्वज बनाना हमारे लिए गौरव का पल : बंदी

जेल की टेलरिंग यूनिट में शामिल दो दर्जन से अधिक बंदी राष्ट्रीय ध्वज को पूरी शिद्दत और जिम्मेदारी से बना रहे है. क्राइम के मुद्दे में कारागार में निरुद्ध होने के बाद समाज ऑफ राष्ट्र के लिए कुछ ऐसा करने का मौका मिला है, जिससे वो अपना खोया हुआ मान और सम्मान वापस पा सकते है. तिरंगे की थान से कटाई से लेकर चक्र की छपाई और फिर उनकी सिलाई में शामिल बंदियों का बोलना है कि वो इससे राष्ट्र की सेवा कर रहे है. जब ये ध्वज फहराए जाएंगे तो उनका सिर भी मान से ऊंचा होगा.