अक्षय कुमार की फिल्म रिलीज से पहले ही घिर गई विवादों में

अक्षय कुमार की फिल्म रिलीज से पहले ही  घिर गई विवादों में

बॉलीवुड अदाकार अक्षय कुमार की फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है. ये फिल्म अब कानूनी दांव-पेंच का सामना करेगी.

रामसेतु राष्ट्रीय धरोहर घोषित होगा या नहीं इसको लेकर मामला उच्चतम न्यायालय के दरवाजे पर है. वहीं रामसेतु को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सुब्रमण्यम स्वामी का मानना है कि वो इस मुद्दे में पहला दौर जीत चुके हैं. वहीं अब रामसेतु एक  बार फिर से चर्चा में है. दरअसल, बॉलीवुड अदाकार अक्षय कुमार की फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है. ये फिल्म अब कानूनी दांव-पेंच का सामना करेगी. फिल्म के अभिनेता अक्षय कुमार पर केस दर्ज करने की खबरे आ रही हैं. मुआवजे की मांग को लेकर भाजपा नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केस दर्ज करने का घोषणा किया है. उनका दावा है कि फिल्म में रामसेतु के मामले को गलत ढंग से पेश किया गया है. 

रामसेतु के मामले को गलत ढंग से पेश किया

मुकदमा दर्ज कराने के बारे में जानकारी स्वयं सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करके दी है. स्वामी का दावा है कि फिल्म में रामसेतु के मामले को गलत ढंग से पेश किया गया. उनका दावा है कि तथ्यों से छेड़छाड़ की गई. अपने ट्वीट में स्वामी ने लिखा कि मुआवजे के वाद को मेरे सहयोगी अधिवक्ता सत्य सभरवाल द्वारा आखिरी रूप दिया गया है. मैं अदाकार अक्षय कुमार और कर्मा मीडिया पर उनकी फिल्म में राम सेतु मामले के चित्रण में मिथ्याकरण के कारण हुए हानि के लिए केस कर रहा हूं. सुब्रमण्यम स्वामी ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि यदि अक्षय कुमार एक विदेश नागरिक हैं तो हम उन्हें अरैस्ट कर उनके गोद लिए राष्ट्र से बेदखल करने के लिए कह सकते हैं.

वकील सत्य सभरवाल ने भी इस मसले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि राम सेतु पर आधारित एक फिल्म का निर्माण कर्मा मीडिया द्वारा किया गया है, जहां डॉ स्वामी के एससी ऑर्डर को पोस्टर के रूप में उपयोग किया गया है. इसको लेकर केस दर्ज कराएंगे. डाक्टर स्वामी की याचिका में पोस्टर और माननीय सर्वोच्च कोर्ट का आदेश संलग्न है. अप्रैल महीने में ही फिल्म रामसेतु का पोस्टर वायरल हुआ था. अक्षय कुमार ने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्टर को शेयर किया.

रामसेतु और स्वामी

राम सेतु, तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर पंबन द्वीप और मन्नार द्वीप के बीच बनी एक श्रृंखला है. रामसेतु को आदम का पुल भी बोला जाता है. रामायण महाकाव्य के मुताबिक सीता को बचाने के लिए श्रीलंका पहुंचने के लिए भगवान राम और उनकी वानर सेना के द्वारा इस पुल का निर्माण किया गया था. रामसेतु को तोड़ने की योजना यूपीए गवर्नमेंट के दौरान अमल में लाई जाने थी. जिसके बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने उच्चतम न्यायालय में इसका विरोध किया. उन्होंने यूपीए गवर्नमेंट की योजना पर रोक की मांग की थी. जिसके बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय गए हैं.