हिंदुस्तान सरकार, वैज्ञानिकों ने किया कोरोना वायरस को लेकर यह बड़ा खुलासा

हिंदुस्तान सरकार, वैज्ञानिकों ने किया कोरोना वायरस को लेकर यह बड़ा खुलासा

हिंदुस्तान सरकार, वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, प्रसिद्ध शख़्सियतों व लोगों में विशेष पहचान रखने वाली कई प्रभावशाली शख़्सियतों ने कोरोनो वायरस महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय किया है,

जिससे पहले ही हिंदुस्तान में पांच लोगों की जान जा चुकी है। दरअसल, ठीक जानकारी व जनता को जागरूक करने वाले संदेशों के अभाव में इस महामारी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसलिए देश में बहुत से लोग अभी भी कोरोना वायरस से बचाव करने में विफल हो रहे हैं। ऐसा ही एक सर्वेक्षण सामने आया है जिसमें यह पता चलता है कि इस महामारी को लेकर लोगों का क्या सोचना है।

भारत एक गर्म देश है
जोश टॉक्स द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण से पता चला है कि 65 फीसदी हिंदुस्तानियों का मानना है कि हिंदुस्तान COVID-19 से प्रभावित नहीं होगा क्योंकि यह एक गर्म देश है। सर्वेक्षण में 45,000 व 40,700 उत्तरदाताओं के दो समूहों से प्रश्न पूछे गए थे, जिसमें सारे हिंदुस्तान के भिन्न-भिन्न हिस्सों से आकंड़े लिए गए हैं। इस सर्वेक्षण के प्रश्न हिंदी, बांग्ला, तेलूगू, तमिल, मलयालम व पंजाबी सहित छह भाषाओं में तैयार किए गए थे। इसका उद्देश्य शहरी हिंदुस्तानियों की जागरूक करना व कोरोनो वायरस की तैयारियों का आंकलन करना था।

गर्मी के मौसम में वायरस का प्रभाव कम
उत्तरदाताओं के पहले समूह के 65.1 फीसदी लोगों का मानना है कि वायरस हिंदुस्तान को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि यह एक गर्म देश है। हालांकि यह उन मिथकों में से एक है, जो इस वायरस के बारे में अनजान हैं। इसमें कई विशेषज्ञ भी शामिल हैं जिनका मत है कि गर्मियों के मौसम में COVID-19 का प्रभाव कम हो जाएगा लेकिन वास्तव में इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है। दरअसल, COVID-19 एक नया वायरस है जो पहले मनुष्यों के लिए अज्ञात था व वैज्ञानिक अभी केवल इसकी उत्पत्ति को समझने में लगे हैं।

कोरोना के बारे में गलत धारणा
इसके अलावा, सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि लगभग 12.5 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना ​​था कि कोरोना वायरस केवल 60 साल की आयु से ऊपर के लोगों को ही होने कि सम्भावना है। यह कोरोना वायरस के बारे में सबसे गलत और आम धारणाओं में से एक है क्योंकि जाँच में कई युवा भी कोरोनो वायरस से पीड़ित पाए गए हैं। यहां तक कि 21 वर्षीय स्पेनिश फुटबॉल कोच फ्रांसिस्को गार्सिया कोरोना वायरस के चलते अपनी जान तक गंवा चुके हैं।

अंडा या चिकन खाने से हो सकती है परेशानी
केवल यही एक गलत धारणा नहीं थीं जो सर्वेक्षण में सामने आई थी। ऐसी ही कई व भी धारणाएं हैं। जैसे उत्तरदाताओं में से 6.1 फीसदी लोगों का मानना है कि अंडे या चिकन खाने से लोग COVID-19 की चपेट में आ जाएंगे। वहीं 5.7 फीसदी लोगों का बोलना है कि इस बीमारी को गोमूत्र (गौमूत्र) या लहसुन के सेवन से सही किया जा सकता है। सर्वेक्षण का दूसरा प्रश्न कोरोनो वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोगों की तैयारियों जुड़ा हुआ था। इस सवाल के जवाब में हिंदुस्तान के 40,700 उत्तरदाताओं में से लगभग 76 फीसदी ने बोला कि स्वच्छता बनाए रखें व एक स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें।

यात्रा करने से बचें
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें व यात्रा करते समय एक फेस मास्क का प्रयोग जरूर करें। इन लोगों ने ये भी बोला कि खांसी होने या पांच दिनों तक किसी भी लक्षण के नजर आने पर चिकित्सक से चैकअप जरूर कराएं। एक ऐसी अफ़वाह भी फैली थी कि कोरोना वायरस ने कुछ ही महीनों के भीतर पूरी संसार में 10,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है। कुछ का यह मानना था कि चवनप्राश या आंवला खाने से इस वायरस से बचा जा सकता है।

धूप सेंकने का सुझाव
वहीं एक ने टिप्पणी की है कि प्रातः काल व रात में एक चम्मच आंवला पाउडर का सेवन करें व कोई कोरोना वायरस कभी भी आपको प्रभावित नहीं कर सकता है। वहीं कुछ का ये मानना था कि बचाव के लिए अपने शरीर को कपड़े से ढक कर रखें व संक्रमण से बचने के तरीका में धूप सेकने का भी सुझाव दिया गया है। इस बिंदु पर ध्यान देना फिर से जरूरी है कि इन सभी धारणाओं का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है। हिंदुस्तान में कोरोना वायरस के पॉजीटिव मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर महाराष्ट्र जैसी कई प्रदेश सरकारों ने पांच से अधिक लोगों के एक जगह पर जमा होने पर रोक लगाने का आह्वान किया है।

ऑनलाइन कार्य करने का निर्देश
कई कार्यालयों व शैक्षिक संस्थानों ने संचालन को औनलाइन करने का निर्णय किया है। बड़े पैमाने पर लोगों को वायरस के प्रसार को कम करने के लिए सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। ऐसे समय में, रोकथाम को रोकने में गलत जानकारी सबको प्रभावित कर सकती है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गत गुरुवार शाम को देश को संबोधित किया था व अलगाव के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 22 मार्च को "जनता कर्फ्यू" के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है।