अमेरिका की दो-टूक, अफगानिस्‍तान में हिंसा छोड़ राजनीतिक समाधान की कोशिशें हों तेज

अमेरिका की दो-टूक, अफगानिस्‍तान में हिंसा छोड़ राजनीतिक समाधान की कोशिशें हों तेज

अमेरिका ने अफगानिस्‍तान में राष्‍ट्रपति निवास पर एक दिन पहले दागे गए रॉकेट की कड़े शब्‍दों में निंदा की है। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्‍तान के लोग देश में अमन और शांति चाहते हैं। ये सब छोड़कर देश में शांति स्‍थापना के लिए राजनीतिक समाधान की राह मजबूत करनी चाहिए। आपको बता दें कि अफगानिस्‍तान में मंगलवार राष्‍ट्रपति निवास के तीन रॉकेट उस वक्‍त गिरे थे जब वहां पर ईद की नमाज अदा की जा रही थी। इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ था। इस घटना के बाद राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने कहा था कि तालिबान किसी भी तरह से शांति का पक्षधर नहीं है। उन्‍होंने ये भी कहा था कि शांति वार्ता के लिए उसके पास आखिरी मौका है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्‍ता नेड प्राइस ने कहा कि काफी समय अफगानिस्‍तान के नागरिक बिना मतलब की हिंसा को झेलने को मजबूर हो रहे हैं। एक वीडियो में दिखाया गया है कि राष्‍ट्रपति गनी अन्‍य लोगों के साथ रॉकेट हमले के बावजूद घबराए नहीं और ईद की नमाज अदा करते रहे। इस हमले की फिलहाल किसी ने अब तक जिम्‍मेदारी नहीं ली है।


अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता का कहना है कि अब ये हिंसा खत्‍म होनी चाहिए। अफगानिस्‍तान के लोगों को देश में शांति स्‍थापना के प्रयासों के लेकर एकजुट होना होगा। अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय अफगानिस्‍तान की मंशा का समर्थन करता है। आपको बता दें कि अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति निवास के करीब मंगलवार को हमला ऐसे समय में किया गया जब तालिबान अफगानिस्‍तान के दो तिहाई इलाके पर कब्‍जा कर चुका है। तालिबापन के एक नेता ने पिछले दिनों मास्‍कों में देश के 80 फीसद से अधिक पर कब्‍जा करने का दावा किया था। गौरतलब है कि जब से अमेरिका ने अफगानिस्‍तान से अपनी फौजों को वापस ले जाने की कवायद शुरू की है तब से देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में तालिबान के हमले भी बढ़ गए हैं। अमेरिका ने 11 सितंबर से पहले अपनी सारी फौज को वापस ले जाने की घोषणा की है। तालिबान से हुए समझौते के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी नाटो फौज ने अफगानिस्‍तान से अपनी फौजों को निकालना शुरू कर दिया है।


अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्‍तान के लोग 4 दशकों से भी अधिक समय से हिंसा से भरे माहौल को बर्दाश्‍त करने को मजबूर हो रहे हैं। प्राइस ने कहा है कि दोहा में तालिबान और अन्‍य सदस्‍यों के बीच हुई 17-18 जुलाई की बैठक में कई सकारात्‍मक कदम उठाए गए थे। दोनों ही तरफ से देश में फैली हिंसा को रोकने के लिए राजनीतिक समाधन को बढ़ाने पर सहमति जताई गई थी। लेकिन जिस तरह की चीजें सामने आ रही हैं उसको देखते हुए जल्‍द की कुछ करने की जरूरत है। हर बार हुई बैठक में दोनों ही पक्षों ने नागरिकों की रक्षा करने की बात कही थी।


अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामले, सामने आ रहे 83 प्रतिशत केस डेल्टा वैरिएंट के जुड़े

अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामले, सामने आ रहे 83 प्रतिशत केस डेल्टा वैरिएंट के जुड़े

अमेरिका में कोरोना महामारी के दौनिक मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। डेल्टा वैरिएंट को संक्रमण की मुख्य वजह बताई जा रही है। देश के जिन हिस्सों में टीकाकरण की रफ्तार कम है, उन हिस्सों से सबसे अधिक 90 प्रतिशत मामले मिल रहे हैं। व्हाइट हाउस के नए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कोविड के अस्पताल में भर्ती होने और मौतों में लगभग सभी 97 प्रतिशत मामले बिना टीकाकरण वाले लोगों के हैं। अमेरिका के कुल कोरोना संक्रमण मामलों में से 40 प्रतिशत मामले तीन राज्यों फ्लोरिडा, टेक्सास और मिसौरी से हैं।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के निदेशक रोशेल वालेंस्की ने व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा डेल्टा वैरिएंट अपनी पूरी क्षमता से देश भर में फैल रहा है। अब अमेरिका में कोरोना वायरस फैलने के लिए 83 प्रतिशत से अधिक डेल्टा वैरिएंट जिम्मेदार है। रोशेल वालेंस्की ने डेल्टी वैरिएंट के प्रति लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आपको टीका नहीं लगाया गया है, तो कृपया आप लोग डेल्टा वैरिएंट को गंभीरता से लें। यह वैरिएंट हर वक्त कमजोर लोगों की तलाश में रहता है। उन्होंने डेल्टा वैरिएंट को सबसे संक्रामक श्वसन वायरस में से एक कहा, जिसे उन्हेोंने अपने 20 साल के करियर में देखा है।


अमेरिका में लोगों का अस्पतालों में भर्ती होना अभी भी जारी है और पिछले एक महीने से यहां कोरोना संक्रमण के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे है। देश में डेल्टा वैरिएंट के 80 प्रतिशत तक फैलने की भविष्यवाणी की गई है, जबकि अन्य तीनों - अल्फा, गामा और बीटा के कुल मामले 9 प्रतिशत से नीचे रहने की भविष्यवाणी की गई है। एक मीडिया आउटलेट के सर्वेक्षण में पाया गया कि अमेरिका में 45 प्रतिशत लोग टीकाकरण नहीं करना चाहते हैं। सर्वेक्षण से पता चला था कि 64 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों को विश्वास नहीं है कि टीके वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं।


देश में 22 जुलाई तक 65 साल या उससे अधिक आयु के 89 प्रतिशत लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक दी गई है और 80 प्रतिशत लोगों को पूरी तरह से टीका लगाए गए हैं। 18 साल या उससे अधिक आयु के लगभग 69 प्रतिशत लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक दी गई है और 60 प्रतिशत लोगों को पूरी तरह से टीका लगाए जा चुके हैं। 12 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को 57 प्रतिशत पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। देश में कोरोना से 610,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।