गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है ब्लीडिंग डिसऑर्डर

गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है ब्लीडिंग डिसऑर्डर

शरीर में जब भी चोट लगती है व खून निकलता है तो अपने आप थक्का जम जाता है. यानी खून का बहना रुक जाता है, लेकिन जब शरीर में प्रोटीन व प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है तो थक्का जमना बंद हो जाता है.

इसे ब्लीडिंग डिसऑर्डर बोला जाता है. यूं तो शरीर से ज्यादा खून बहना खतरनाक है, लेकिन ब्लीडिंग डिसऑर्डर तब ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब ब्लीडिंग शरीर के अंदर भी प्रारम्भ हो जाती है. यह रक्त स्राव किसी भी रूप में होने कि सम्भावना है जैसे छोटी-सी खरोंच, नाक से खून निकलना, महिलाओें में मासिक चक्र के दौरान ज्यादा खून बहना.से जुड़े ऐम्स के डाक्टर आयुष पांडे के अनुसार, आंतरिक रक्त स्राव तब होता है जब क्षतिग्रस्त रक्त वाहिक या किसी अंदरूनी अंग से रक्त शरीर के अंदर बहने लगता है. यदि गर्भवती महिला की योनी से खून बह रहा है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

हेमोफिलिया एक प्रकार का ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, जिसका संबंध मूल रूप से अनुवांशिक है. हर 10,000 पुरुषों में से एक में यह बीमारी होती है. हिंदुस्तान में इसके 1.3 लाख से अधिक मरीज हैं.

गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है ब्लीडिंग डिसऑर्डर

ब्लीडिंग डिसऑर्डर शरीर में कई गंभीर बीमारियों का इशारा देता है. जैसे लिवर की बीमारी, हीमोफीलिया, विटामिन के की कमी. खून पतला करने की दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी खून का थक्का बनना बंद होने कि सम्भावना है. एनीमिया में ब्लीडिंग डिसऑर्डर बहुत खतरनाक होने कि सम्भावना है.

ब्लीडिंग डिसऑर्डर का बड़ा खतरा

आंतों में रक्त स्राव

मस्तिष्क में रक्त स्राव

जोड़ों में रक्त स्राव

जोड़ों का दर्द

महिलाओं के इसलिए है ज्यादा खतरा

महिलाओं में ब्लीडिंग डिसऑर्डर का ज्यादा खतरा इसलिए होता है, क्योंकि मासिक चक्र के दौरान खून निकलता है. यह समस्या इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हमारे यहां महिलाएं रक्त स्राव के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं. महत्वपूर्ण है कुछ सामान्य लक्षणों पर नजर रखना व ठीक वक्त पर उपचार लेना. जैसे - मासिक चक्र के दौरान सात दिन या इससे अधिक दिनों तक खून का बहना जारी रहना, खून ज्यादा बहने से कमजोरी होना व रोजमर्रा के कार्य को करने में कठिनाई आना, रक्त स्राव के दौरान खून के थक्के निकलना. कई बार बिना कारण नाक से खून निकलना प्रारम्भ हो जाता है. मसुड़ो से रोज-रोज खून निकलना.

इलाज से ज्यादा महत्वपूर्ण है सावधानी

ब्लीडिंग डिसऑर्डर में उपचार से ज्यादा आवश्यकता सावधानी की होती है. छोटी सी खरोंच या चोट लगे तो भी ध्यान दें कि खून का बहना थम गया है या नहीं. मस्तिष्क के अंदर खून का बहाव खतरनाक होने कि सम्भावना है. ऐसा कोई इशारा मिले तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं. आमतौर पर आयरन सप्लिमेंट के जरिए इसका उपचार किया जाता है. ब्लीडिंग डिसऑर्डर के अन्य उपचार में शामिल हैं - ब्लड ट्रांसफ्यूजन, प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन, नेजल स्प्रे. ताजा प्लाज्मा में कारक V व VIII होते हैं. ये दो जरूरी प्रोटीन हैं जो रक्त के थक्के बनाने में मदद करते हैं. इसके लिए अस्पताल जाना महत्वपूर्ण है.