दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराना चाहते हैं अपना Home Loan, तो जान लीजिए कितना आएगा खर्च

दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराना चाहते हैं अपना Home Loan, तो जान लीजिए कितना आएगा खर्च

अगर आपका कोई होम लोन चल रहा है और आप उसे किसी और लेंडर के पास ट्रांसफर कराने की सोच रहे हैं तो आपके दिमाग में कई तरह के सवाल चल रहे होंगे। मसलन, इसका प्रोसेस क्या है या इसमें कितना खर्च आता है इत्यादि। Jagran Money Mantra के इस लेटेस्ट अंक में हमने टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट Balwant Jain से इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। जैन ने बताया कि होम लोन ट्रांसफर करते समय सबसे ज्यादा हमें लोन की कुल लागत में आने वाली कमी को ध्यान में रखना चाहिए। इस बातचीत के संपादित अंश इस प्रकार हैंः

सवालः किसी भी व्यक्ति को Home Loan ट्रांसफर क्यों कराना चाहिए?

बलवंत जैनः अगर किसी व्यक्ति का किसी बैंक या एनबीएफसी में कोई होम लोन (Home Loan) चल रहा है, तो उसे मार्केट में चल रहे ब्याज दर को ध्यान में रखना चाहिए। अगर उसे लगता है कि वह जिस ब्याज दर पर लोन का भुगतान कर रहा है, उससे कम दर पर अन्य लेंडर लोन दे रहे हैं तो उसे लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि होम लोन एक लंबी अवधि की जवाबदेही है और ब्याज दर में मामूली अंतर से भी आपके द्वारा जमा की जाने वाली कुल राशि में बहुत फर्क आ जाता है।

दूसरा, कई बार लोन लेते समय आय के डॉक्यूमेंट पूरे नहीं होने या प्रोपर्टी के पूरे दस्तावेज नहीं होने या कम एलिजिबिलिटी होने की वजह से हम नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों से ऊंची दरों पर कर्ज ले लेते हैं। इसकी वजह यह है कि तब हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं होते हैं। लेकिन दो-तीन साल तक समय पर लोन के भुगतान या फिर जरूरी डॉक्यूमेंट मिल जाने के बाद हम अपनी लोन की कुल लागत घटाने के लिए हमें लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोचना चाहिए।
सवालः Home Loan Transfer कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?


बलवंत जैनः अगर कोई व्यक्ति होम लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोच रहा है तो उसे यह ध्यान में रखना चाहिए कि जिस बैंक से उसका लोन चल रहा है, वहां लोन के प्री-पेमेंट पर किसी तरह का पेनाल्टी देय तो नहीं है। आरबीआई के गाइडलाइंस के मुताबिक बैंक प्रीपेमेंट या रिपेमेंट के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं ले सकते हैं। एनबीएफसी कुछ मामलों में ये चार्जेज लगा सकते हैं। वहीं, अगर आपने फिक्स रेट पर लोन लिया है तो बैंक आपसे प्रीपेमेंट या रिपेमेंट चार्ज ले सकते हैं। तो आपको यह ध्यान में रखना होगा कि लोन के प्री-पेमेंट या रिपेमेंट की लागत कितनी आती है।

इसके अलावा आपको ट्रांसफर में लगने वाली प्रोसेसिंग फीस पर भी गौर करना होगा।
आपको इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि आपके लोन की कुल कितनी अवधि बची हुई है। अगर आपकी लंबी अवधि का लोन बचा हुआ है तो आपको लोन ट्रांसफर कराना ही चाहिए। लेकिन अगर थोड़ी अवधि ही बची है और आपको लोन ट्रांसफर में आने वाली लागत ब्याज दर में कमी से होने वाली बचत से ज्यादा है तो फिर इस पूरी कवायद का कोई मतलब नहीं रह जाता।
सवालः लोन ट्रांसफर कराने पर टैक्स में किस तरह की छूट मिलती है?

बलवंत जैनः लोन ट्रांसफर कराने के लिए नए लेंडर को दिए जाने वाली प्रोसेसिंग फीस और पुराने लेंडर को दिए जाने वाले प्रीपेमेंट चार्ज पर आयकर अधिनियम के सेक्शन 24 (B) के तहत इनकम टैक्स में छूट क्लेम किया जा सकता है।

इसके अलावा आयकर अधिनियम के सेक्शन 24 के तहत आप अगर पहली बार लोन ट्रांसफर कराते हैं तो दूसरे लोन को भी होम लोन के रूप में ट्रीट किया जाता है।

सवालः Home Loan ट्रांसफर कराने का प्रोसेस क्या है?

बलवंत जैनः देखिए, होम लोन ट्रांसफर कराने की मुख्य वजह यह होती है कि आपका जो पुराना लेंडर है, वह ज्यादा ब्याज ले रहा है। ऐसे में जब आप यह देखते हैं कि कई अन्य लेंडर कम ब्याज पर लोन दे रहे हैं तो आपको सबसे पहले अपने लेंडर से संपर्क करना चाहिए। आपको अपने मौजूदा लेंडर को बोलना चाहिए कि मुझे लोन ट्रांसफर कराना है क्योंकि आप ज्यादा ब्याज ले रहे हैं। ऐसे में कई बार यह संभव होता है कि मौजूदा लेंडर ही आपको कुछ चार्ज लेकर कोई बेहतर रेट ऑफर कर दे।

अगर बैंक बेहतर ब्याज दर की पेशकश नहीं करता है तो आप उनसे यह कहिए कि 'मुझे लोन ट्रांसफर कराना है, आप मुझे Liability का एक सर्टिफिकेट दे दीजिए।' बैंक कुछ दिन के भीतर ही यह डॉक्यूमेंट दे देता है। आपको यह लेटर नए लेंडर को दिखाना होता है। नया लेंडर उस राशि का चेक या DD तैयार करके पुराने लेंडर को देता है और उससे प्रोपर्टी के कागजात ले लेता है। आपको महज नए लेंडर के डॉक्यूमेंट्स पर हस्ताक्षर करना होता है और केवाईसी से जुड़े दस्तावेज देने की जरूरत होती है।
सवालः इस पूरे प्रोसेस में क्या खर्च आता है?

बलवंत जैनः मैंने जैसा कि पहले बताया कि अगर आपको किसी तरह का प्री-पेमेंट या रिपेमेंट शुल्क देने की जरूरत पड़ती है या फिर आपको प्रोसेसिंग फीस देनी पड़ रही है तो इसे आप खर्च मान सकते हैं। कई मामलों में ये चीजें माफ हो जाती हैं। आपको केवल स्टांप ड्यूटी वगैरह और प्रोफेशनल खर्च वगैरह देना पड़ सकता है। हालांकि, कई बार फेस्टिव सीजन में ये सारे चार्जेज माफ हो जाते हैं। इसलिए अलग-अलग बॉरोअर के लिए यह खर्च अलग-अलग हो सकता है।


निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी, जुलाई के शुरुआती तीन सप्ताह में 45 फीसद की बढ़ोतरी

निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी, जुलाई के शुरुआती तीन सप्ताह में 45 फीसद की बढ़ोतरी

चालू वित्त वर्ष में निर्यात में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। जुलाई के शुरुआती तीन सप्ताह में वस्तुओं के निर्यात में पिछले वर्ष समान अवधि के मुकाबले 45.13 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2019 की समान अवधि के मुकाबले यह बढ़ोतरी 25.42 फीसद की है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2021) में 95.39 अरब डालर का निर्यात किया गया जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 85 फीसद और वर्ष 2019 की समान अवधि के मुकाबले 17.90 फीसद अधिक है।

पिछले वर्ष अप्रैल-जून में 51.32 अरब डालर का निर्यात किया गया, जो वर्ष 2019 के अप्रैल-जून में 80.91 अरब डालर का था। कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद अप्रैल से वस्तुओं के निर्यात में दहाई अंकों की बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है।वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक इस वर्ष जुलाई के शुरुआती तीन सप्ताह (21 जुलाई तक) में 22.48 अरब डालर का निर्यात किया गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 15.49 अरब डालर का था। वर्ष 2019 के जुलाई के शुरुआती तीन सप्ताह में 17.92 अरब डालर का निर्यात हुआ था।

इस वर्ष समीक्षाधीन अवधि में आयात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 64.82 फीसद बढ़कर 31.77 अरब डालर पर पहुंच गया। वर्ष 2019 की समान अवधि में 25.77 अरब डालर का आयात किया गया था। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही का आयात पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले 108 फीसद बढ़कर 126.15 अरब डालर हो गया। चालू वित्त में तेजी को देखते हुए वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने 400 अरब डालर के निर्यात का लक्ष्य रखा है।